सनातन धर्म में ऐसा माना जाता है की किसी भी व्रत का उद्यापन करने के बाद ही उस व्रत का पूर्ण फल और पुण्य प्राप्त होता है। व्रत रखने के दौरान पूजा पाठ या प्रभु की भक्ति में जाने अनजाने में अगर हमसे कोई गलती हो जाती है तो अंतिम पूजा यानि उद्यापन की पूजा में हम प्रभु से क्षमा याचना करते हैं। उद्यापन में अपने सामर्थ्य के अनुसार दान और हवन किया जाता है और ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। हम व्रत रूपी तपस्या करके प्रभु को प्रसन्न करने का प्रयत्न करते हैं और उद्यापन करके उस तपस्या के फल की प्राप्ति की विनती प्रभु से करते हैं। इसलिए अगर आप कोई व्रत रखते हैं तो उसका पूरे विधि विधान से उद्यापन जरूर करें।
हर व्रत के उद्यापन की विधि थोड़ी थोड़ी अलग होती हैं। अगर साप्ताहिक व्रत रखते हैं और उद्यापन करना चाहते हैं तो मेरे blog को जरूर visit करें।
16 सोमवार व्रत के उद्यापन की विधि