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वृत की परिधि पर

सुहानी माथुर की प्रोफाइल फ़ोटो

वृत्त की स्पर्श रेखा वृत्त को कितने बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है?

ऐसे तो किसी भी वृत पर असंख्य विंदु हो सकते है लेकिन जब कोई रेखा स्पर्श करती है तो एक और सिर्फ एक हीं मानी जाती है !!!

वृत्त की स्पर्श रेखा और छेदक रेखा (Tangent and Secant of Circles) की परिभाषा इस प्रकार दे सकते है:--

छेदक रेखा – यदि कोई रेखा किसी वृत्त में, वृत्त के दो बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है, तो वह रेखा वृत्त की छेदक रेखा (Secant of Circle) कहलाती है।

नीचे दी गई रेखांचित्र देखिये :--

उपरोक्त आकृतियों में,

रेखा PQ एक छेदक रेखा है

जो वृत्तों को बिंदुओं A और B पर प्रतिच्छेद करती है, जिन्हें प्रतिच्छेद बिंदु कहा जाता है।

छेदक रेखा

वृत्त की स्पर्श रेखा वृत्त को कितने बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है?

ऐसे तो किसी भी वृत पर असंख्य विंदु हो सकते है लेकिन जब कोई रेखा स्पर्श करती है तो एक और सिर्फ एक हीं मानी जाती है !!!

वृत्त की स्पर्श रेखा और छेदक रेखा (Tangent and Secant of Circles) की परिभाषा इस प्रकार दे सकते है:--

छेदक रेखा – यदि कोई रेखा किसी वृत्त में, वृत्त के दो बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है, तो वह रेखा वृत्त की छेदक रेखा (Secant of Circle) कहलाती है।

नीचे दी गई रेखांचित्र देखिये :--

उपरोक्त आकृतियों में,

रेखा PQ एक छेदक रेखा है

जो वृत्तों को बिंदुओं A और B पर प्रतिच्छेद करती है, जिन्हें प्रतिच्छेद बिंदु कहा जाता है।

छेदक रेखा हमेशा वृत्त को दो बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है। यदि हम केवल प्रतिच्छेद बिन्दुओं को लें, तो छेदक रेखा वह वृत की जीवा कहलाती है !!!

स्पर्श रेखा – यदि कोई रेखा किसी वृत्त में, वृत के किसी एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करती है, तो वह रेखा वृत्त की स्पर्श रेखा (Tangent of Circle) कहलाती है।

नीचे दी गई रेखांचित्र देखिये :--

उपरोक्त आकृतियों में,

रेखा PQ स्पर्श रेखा है जो वृत्तों को बिंदु A पर प्रतिच्छेद करती है।

स्पर्श रेखा वृत्त को हमेशा एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करती है। स्पर्शरेखा, छेदक रेखा की वह विशेष स्थिति मानी जाती है जिसमें उसकी संगत या साथ के जीवाओं के दोनों सिरे एक दूसरे से एक बिंदु पर मिलते हैं।

स्पर्श रेखा वृत्त को एक बिंदु पर स्पर्श करती है जिसे स्पर्श बिंदु भी कह सकते हैं ।

यह बिंदु, स्पर्श रेखा और वृत्त का (उभयनिष्ठ) का अर्थ दोनों सिराओं के बिंदु हो सकती है।

ध्यान रखें यदि हम स्पर्श बिंदु पर एक से अधिक स्पर्श रेखाएं नहीं खींच सकते हैं और यदि हम खींचने की कोशिश करते हैं तो अन्य रेखाएं छेदक रेखाएं बन जाती है।

लेख पढ़कर बता सकते है उपयोगी लगी या नहीं 😊😊

धन्यवाद

🙏🙏

इमेज साभार गूगल

प्रस्तुति स्वयं की !!!

सिर्फ दो रेखाये जैसे कि दर्शायी गई है

सिर्फ दो रेखाये जैसे कि दर्शायी गई है

विकास दुबे की प्रोफाइल फ़ोटो

किसी भी वृत्त के अंदर बने आयत का क्षेत्रफल अधिकतम करना है :

  • यह सबसे पहले समझना होगा कि ऐसा करने के कई तरीक़े हैं, पर ऐसा कैसे होता है इस बात का इंटूशन विकसित करना ज़रूरी है ।
    • फ़ॉर्म्युला और रोबोटिक गणना हमें इंटूशन से दूर ले जाएगी ।
    • क्या साधारण तर्क हमें इसका हल बता सकता है ? देखते हैं ।

अब हर बहुभुज को छोटे त्रिभुजों में विभाजित किया जा सकता है :

  • खुद से कर के देख सकते हैं, या बहुत से थ्योरम इस बारे में हैं उन्हें पढ़ कर फिर खुद से कर के देख सकते हैं ।
  • चूँकि आयत वृत्त के अंदर है इस के व्यास को त्रिभुज का कर्ण मान कर इसे दो त्रिभुज में विभाजित किया जा सकता है :
    • ऐसे दोनों त्रिभुज समकोण त्रिभुज होंगे।
      • क्

किसी भी वृत्त के अंदर बने आयत का क्षेत्रफल अधिकतम करना है :

  • यह सबसे पहले समझना होगा कि ऐसा करने के कई तरीक़े हैं, पर ऐसा कैसे होता है इस बात का इंटूशन विकसित करना ज़रूरी है ।
    • फ़ॉर्म्युला और रोबोटिक गणना हमें इंटूशन से दूर ले जाएगी ।
    • क्या साधारण तर्क हमें इसका हल बता सकता है ? देखते हैं ।

अब हर बहुभुज को छोटे त्रिभुजों में विभाजित किया जा सकता है :

  • खुद से कर के देख सकते हैं, या बहुत से थ्योरम इस बारे में हैं उन्हें पढ़ कर फिर खुद से कर के देख सकते हैं ।
  • चूँकि आयत वृत्त के अंदर है इस के व्यास को त्रिभुज का कर्ण मान कर इसे दो त्रिभुज में विभाजित किया जा सकता है :
    • ऐसे दोनों त्रिभुज समकोण त्रिभुज होंगे।
      • क्योंकि एक अर्द्धवृत्त में बनाया गया त्रिभुज समकोण त्रिभुज होता है ।
      • और अब हम कह सकते हैं कि दोनों समकोण त्रिभुजों से आयत बना हुआ है ।

अब प्रश्न यह है है कि यदि हम इन दोनों सर्वांगसम त्रिभुज के क्षेत्रफल को अधिकतम कर दें तब आयत का क्षेत्रफल अधिकतम हो जाएगा :

  • चूँकि समकोण त्रिभुज एक वृत्त के अंदर है इसलिए :
    • किसी दिए गए आधार पर एक वृत्त के अंदर निर्मित सभी त्रिभुजों में समद्विबाहु त्रिभुज का क्षेत्रफल अधिकतम होता है :
      • क्योंकि समद्विबाहु त्रिभुज की ऊँचाई अधिकतम होती है और एक समान आधार के लिए सबसे ऊँचा त्रिभुज अधिकतम क्षेत्रफल का होगा ।
      • इसलिए क्योंकि क्षेत्रफल= १/२ आधार [math]\times [/math] ऊँचाई।
      • मतलब इन त्रिभुजो को समद्विबाहु त्रिभुज होना होगा ।
    • इसका मतलब है कि हमारे आयात की चारों भुजाएँ बराबर हैं। मतलब यह आयत एक वर्ग है जिसकी एक भुजा [math]\sqrt{2} r[/math]के बराबर है ।

अतः इस आयात का क्षेत्रफल [math]2r^2 [/math] के बराबर होगा ।

नीचे दिए चित्र से परिस्थिति समझ सकते हैं :

यह ध्यान दीजिए कि यह नतीजा हमने सिर्फ़ साधारण तर्क और गणित के बहुत हीं साधारण थ्योरम की मदद से ज्ञात किया है जो कि इंटूयूटिव है । गणित ऐसे हीं पढ़ना होता है ।

फुटनोट

Solver Rudransh की प्रोफाइल फ़ोटो

वृत्ति (वेतन, आय या आमदनी) वह धनराशि होती है जो किसी व्यक्ति को उसकी सेवाओं, श्रम, या व्यापारिक गतिविधियों के बदले में प्राप्त होती है। यह एक नियमित और आवर्ती आय होती है। अब, इस संदर्भ में "शुद्ध करना" का अर्थ है कि आय से विभिन्न कटौतियों और व्यय को घटाने के बाद बची हुई राशि का निर्धारण करना।

वृत्ति का शुद्धिकरण:

वृत्ति को शुद्ध करने का मतलब होता है कि कुल आय से सभी कटौतियों, करों, और अन्य व्यय को घटाकर शुद्ध आय निकालना। इसे निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है:

  1. सकल आय (Gross Income): यह आपकी कुल आय होती है, जिसमें वेतन, बोनस, भत्ते, और अन्य आय शामिल होती हैं।
  2. कटौतियां (Deductions):कर: आपकी आय पर

वृत्ति (वेतन, आय या आमदनी) वह धनराशि होती है जो किसी व्यक्ति को उसकी सेवाओं, श्रम, या व्यापारिक गतिविधियों के बदले में प्राप्त होती है। यह एक नियमित और आवर्ती आय होती है। अब, इस संदर्भ में "शुद्ध करना" का अर्थ है कि आय से विभिन्न कटौतियों और व्यय को घटाने के बाद बची हुई राशि का निर्धारण करना।

वृत्ति का शुद्धिकरण:

वृत्ति को शुद्ध करने का मतलब होता है कि कुल आय से सभी कटौतियों, करों, और अन्य व्यय को घटाकर शुद्ध आय निकालना। इसे निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है:

  1. सकल आय (Gross Income): यह आपकी कुल आय होती है, जिसमें वेतन, बोनस, भत्ते, और अन्य आय शामिल होती हैं।
  2. कटौतियां (Deductions):कर: आपकी आय पर लागू होने वाले विभिन्न कर (जैसे आयकर)।निवेश: जैसे पीएफ (प्रोविडेंट फंड), बीमा प्रीमियम, एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम)।अन्य कटौतियां: जैसे ऋण की किस्तें, कर्मचारी भविष्य निधि, स्वास्थ्य बीमा।
  3. शुद्ध आय (Net Income): यह आपकी सकल आय से सभी कटौतियों को घटाकर निकाली गई राशि होती है।

शुद्ध आय निकालने का उदाहरण:

मान लीजिए कि आपकी मासिक सकल आय ₹50,000 है। अब, इसमें से निम्नलिखित कटौतियां हैं:

  • आयकर: ₹5,000
  • पीएफ योगदान: ₹2,000
  • स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम: ₹1,000

इस प्रकार, आपकी कुल कटौतियां होंगी:

[math]कुल कटौतियां=₹5,000+₹2,000+₹1,000=₹8,000[/math]

अब, शुद्ध आय निकालने के लिए: [math]शुद्ध आय=सकल आय−कुल कटौतियां[/math]

[math]शुद्ध आय=₹50,000−₹8,000=₹42,000[/math]

इस प्रकार, शुद्ध आय ₹42,000 होगी।

निष्कर्ष: वृत्ति का शुद्धिकरण करने के लिए सकल आय से सभी आवश्यक कटौतियों को घटाया जाता है, जिससे शुद्ध आय प्राप्त होती है।

विकास पटवा की प्रोफाइल फ़ोटो

वृत की त्रिज्या स्पर्श रेखा पर लंबवत होती है अर्थात वृत्त की त्रिज्या और वृत्त की स्पर्श रेखा के बीच का कोण 90 अंश का होता है

चित्र मैंने समझाने हेतु बनाया है

मौजूदा चित्र में वृत्त का केंद्र है तथा बिंदु कैपिटल A से दो स्पर्श रेखाएं AC व AB खींची गई हैं जिसमें साफ दिख रहा है कि कोण OCA वा कोण OBA 90 अंश के हैं

  1. मैं आपको स्पष्ट कर दूं कि किसी एक बाहरी बिंदु से किसी वृत्त पर अधिकतम दो स्पर्श रेखाएं खींची जा सकती हैं।
  2. किसी वृत्त की असंख्य स्पर्श रेखाएं होती हैं

वृत की त्रिज्या स्पर्श रेखा पर लंबवत होती है अर्थात वृत्त की त्रिज्या और वृत्त की स्पर्श रेखा के बीच का कोण 90 अंश का होता है

चित्र मैंने समझाने हेतु बनाया है

मौजूदा चित्र में वृत्त का केंद्र है तथा बिंदु कैपिटल A से दो स्पर्श रेखाएं AC व AB खींची गई हैं जिसमें साफ दिख रहा है कि कोण OCA वा कोण OBA 90 अंश के हैं

  1. मैं आपको स्पष्ट कर दूं कि किसी एक बाहरी बिंदु से किसी वृत्त पर अधिकतम दो स्पर्श रेखाएं खींची जा सकती हैं।
  2. किसी वृत्त की असंख्य स्पर्श रेखाएं होती हैं
Rakesh Kumar Bhardwaj की प्रोफाइल फ़ोटो

स्पर्श रेखा( Tangent) – किसी वृत्त की स्पर्श रेखा वह रेखा है जो उस वृत्त को केवल एक ही बिन्दु पर प्रतिच्छेद (intersect) करती है। इस बिंदु को स्पर्श बिंदु (point of conact या point of tangency) कहते हैं।

वृत्त के किसी बिन्दु पर स्पर्श रेखा, स्पर्श बिन्दु से जाने वाली त्रिज्या पर लम्ब होती है। चित्र में XY एक स्पर्श रेखा , OP त्रिज्या और P स्पर्श बिंदु है। OP, XY पर लम्ब है।

छेदक रेखा ( Secant)– किसी वृत्त की छेदक रेखा वह रेखा है जो उस वृत्त को दो भिन्न बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करती है। चित्र में PQ एक छेदक रेखा है जो वृत्त को दो भिन्न बिंदुओं A और B पर प्रतिच्छेद करती है।

स्पर्श रेखा( Tangent) – किसी वृत्त की स्पर्श रेखा वह रेखा है जो उस वृत्त को केवल एक ही बिन्दु पर प्रतिच्छेद (intersect) करती है। इस बिंदु को स्पर्श बिंदु (point of conact या point of tangency) कहते हैं।

वृत्त के किसी बिन्दु पर स्पर्श रेखा, स्पर्श बिन्दु से जाने वाली त्रिज्या पर लम्ब होती है। चित्र में XY एक स्पर्श रेखा , OP त्रिज्या और P स्पर्श बिंदु है। OP, XY पर लम्ब है।

छेदक रेखा ( Secant)– किसी वृत्त की छेदक रेखा वह रेखा है जो उस वृत्त को दो भिन्न बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करती है। चित्र में PQ एक छेदक रेखा है जो वृत्त को दो भिन्न बिंदुओं A और B पर प्रतिच्छेद करती है।

वैश्विक गुरु की प्रोफाइल फ़ोटो

**वृत्ति** (Vritti) एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है “वृत्ति” या “प्रवृत्ति।” यह विभिन्न संदर्भों में उपयोग किया जाता है, लेकिन आमतौर पर इसका उपयोग मानसिक अवस्थाओं और चिंताओं के संदर्भ में होता है। योग और वेदांत में, वृत्ति को मन की प्रवृत्तियों या मानसिक गतिविधियों के रूप में देखा जाता है।

### वृत्ति के प्रकार और संदर्भ

1. **योग के संदर्भ में**:

- **वृत्ति**: योगसूत्रों में, विशेषकर पतंजलि के योगसूत्र में, वृत्तियों को मन की विभिन्न अवस्थाएँ या प्रवृत्तियाँ माना गया है जो मन की शांति और स्थिरता को प्रभावित करती हैं।

- **प्रकार**: इनमें विभिन्न प्रकार की वृत्तियाँ होती हैं, जैसे चित्तवृत्ति,

**वृत्ति** (Vritti) एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है “वृत्ति” या “प्रवृत्ति।” यह विभिन्न संदर्भों में उपयोग किया जाता है, लेकिन आमतौर पर इसका उपयोग मानसिक अवस्थाओं और चिंताओं के संदर्भ में होता है। योग और वेदांत में, वृत्ति को मन की प्रवृत्तियों या मानसिक गतिविधियों के रूप में देखा जाता है।

### वृत्ति के प्रकार और संदर्भ

1. **योग के संदर्भ में**:

- **वृत्ति**: योगसूत्रों में, विशेषकर पतंजलि के योगसूत्र में, वृत्तियों को मन की विभिन्न अवस्थाएँ या प्रवृत्तियाँ माना गया है जो मन की शांति और स्थिरता को प्रभावित करती हैं।

- **प्रकार**: इनमें विभिन्न प्रकार की वृत्तियाँ होती हैं, जैसे चित्तवृत्ति, क्लीष्ठवृत्ति (अशांति देने वाली वृत्तियाँ), और अक्लीष्ठवृत्ति (शांति देने वाली वृत्तियाँ)।

2. **आयुर्वेद और चिकित्सा में**:

- **वृत्ति**: आयुर्वेद में, वृत्ति का संदर्भ शरीर के स्वाभाविक क्रियाओं और मन की स्थितियों से होता है जो स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती हैं।

- **प्रकार**: इसमें विभिन्न प्रकार की वृत्तियाँ हो सकती हैं जैसे वात, पित्त, और कफ (तीन दोष) जो शरीर और मन की स्थिति को प्रभावित करती हैं।

### वृत्ति को शुद्ध करने के उपाय

वृत्ति को शुद्ध करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

1. **योग और ध्यान**:

- **योग आसन**: नियमित योगाभ्यास और विशेष ध्यान आसनों से मानसिक स्थिरता और शांति प्राप्त की जा सकती है।

- **ध्यान**: ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास करने से मन की वृत्तियाँ शांत होती हैं और मानसिक स्पष्टता मिलती है।

2. **आहार और जीवनशैली**:

- **संतुलित आहार**: पाचन और स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार का सेवन करें जो शरीर और मन को शुद्ध करता है।

- **स्वस्थ जीवनशैली**: नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, और तनाव प्रबंधन से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखें।

3. **आध्यात्मिक अभ्यास**:

- **स्वाध्याय**: धार्मिक या आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें और आत्मज्ञान प्राप्त करें।

- **सद्गुरु की सेवा**: सद्गुरु या शिक्षक के मार्गदर्शन में आध्यात्मिक और मानसिक विकास करें।

4. **सकारात्मक सोच और मनोबल**:

- **सकारात्मक सोच**: नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों में परिवर्तित करने का प्रयास करें।

- **मनोबल बढ़ाना**: आत्म-संयम और आत्म-विश्वास को बढ़ाने के लिए आत्म-संवाद और प्रेरणा का उपयोग करें।

इन उपायों के माध्यम से आप अपनी मानसिक वृत्तियों को शुद्ध कर सकते हैं और मन की शांति प्राप्त कर सकते हैं।

सौरभ कुमार की प्रोफाइल फ़ोटो

माना कि वृत की परिधि =2πr ; जहां r =radius (त्रिज्या)

व्यास = 2r

प्रश्न से :-

वृत्त की परिधि - व्यास =15

2πr - 2r =15

2r (π -1 ) =15

2r(22/7 -1)=15

2r × 15/7 =15

2r =7

r= 7/2 =3.5 मीटर

पुनः

वृत का क्षेत्रफल =π×r×r =π × 3.5× 3.5

=22/7×3.5×3.5 = 38.5 वर्ग मीटर ।

अतः वृत्त का क्षेत्रफल 38.5 वर्ग मीटर होगा ।

माना कि वृत की परिधि =2πr ; जहां r =radius (त्रिज्या)

व्यास = 2r

प्रश्न से :-

वृत्त की परिधि - व्यास =15

2πr - 2r =15

2r (π -1 ) =15

2r(22/7 -1)=15

2r × 15/7 =15

2r =7

r= 7/2 =3.5 मीटर

पुनः

वृत का क्षेत्रफल =π×r×r =π × 3.5× 3.5

=22/7×3.5×3.5 = 38.5 वर्ग मीटर ।

अतः वृत्त का क्षेत्रफल 38.5 वर्ग मीटर होगा ।

आपकी प्रतिक्रिया निजी है
क्या यह आपके समय के हिसाब से उपयुक्त था?
इससे हमें पेज पर जवाब छांटने में मदद मिलती है
बिल्कुल नहीं
निश्चित रूप से हाँ
Abhimanyu Sinha की प्रोफाइल फ़ोटो

किसी भी वृत्त की स्पर्श रेखा वृत्त को केवल एक और एक बिंदु पर छूती हुई गुजरती है यदि रेखा प्रतिशत करें तो निश्चित रूप से वह किसी अन्य दो बिंदुओं को पार करते हुए जाएगी इसीलिए स्पर्श रेखा केवल एक बिंदु को छूती हुई अर्थात स्पर्श करती हुई आगे निकलती है।

किसी भी वृत्त की स्पर्श रेखा वृत्त को केवल एक और एक बिंदु पर छूती हुई गुजरती है यदि रेखा प्रतिशत करें तो निश्चित रूप से वह किसी अन्य दो बिंदुओं को पार करते हुए जाएगी इसीलिए स्पर्श रेखा केवल एक बिंदु को छूती हुई अर्थात स्पर्श करती हुई आगे निकलती है।

Ramesh Kumar Suri की प्रोफाइल फ़ोटो

आप क्षेत्रफल का सूत्र आप भूल गए हो। आप circumference का सूत्र तो नही भूले।

Triangle का एरिया का सूत्र भी आपको आता है।

आप वृत्त लीजिए। उसे प्याज की गोल स्लाइस मानिए। उसका बाहर का रिंग काट कर सीधा रखिए। उसकी लंबाई

circumference के बराबर होगी।

यानी 2π r

इसके ऊपर दूसरा रिंग काट के रखिए।

उसके ऊपर तीसरा

ऐसा करते जाइए। लास्ट में एक बिंदु जैसा होगा।

यह triagle बनेगी जिसका बेस होगा

2π r और हाइट होगी r

इस ट्रायंगल का एरिया होगा

2π r*r/2

=π r*r

=π r*r

अब तो आप को सूत्र मिल गया न।

सुरेन्द्र वर्मा की प्रोफाइल फ़ोटो

वृत्ति एक प्रकार की आदत है और गरीब स्कूली बच्चो के लिए वरदान है। कुछ वृत्तिया खराब होती है जैसे भिक्षावृत्ति और छात्रवृत्ति गरीब बच्चो के पढाई मे सहायक होती हैं।

Quora User की प्रोफाइल फ़ोटो

एक रोचक प्रश्न पूंछने के लिए प्रश्नकर्ता को धन्यवाद| यह प्रश्न रोचक इसलिए है क्योंकि यह दर्शाता है कि जीवन में कहीं से कुछ भी सीखा जा सकता है | और इसी के साथ एक गहरी लेकिन आभासी तौर पर सच न लगने वाली बात भी उजागर करता है| वो ये है कि किसी भी जवाब को अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए जवाब देने वाला नहीं बल्कि जवाब सुनने वाला महत्वपूर्ण होता है | यहाँ पर सुनना और जवाब देना किस भी माध्यम से हो सकता है: पढ़कर, सुनकर, देख कर या महसूस कर के|

आइये अब प्रश्न पर आते हैं |

मुझे लगता है कि वृत्त से निम्न लिखित बातें सीखी जा सकती हैं :

  • किसी घर्षण युक्त उबड़ खाबड़ रस्ते पर अगर किसी आकार को चलाया जाए तो वृत्त का आकार

एक रोचक प्रश्न पूंछने के लिए प्रश्नकर्ता को धन्यवाद| यह प्रश्न रोचक इसलिए है क्योंकि यह दर्शाता है कि जीवन में कहीं से कुछ भी सीखा जा सकता है | और इसी के साथ एक गहरी लेकिन आभासी तौर पर सच न लगने वाली बात भी उजागर करता है| वो ये है कि किसी भी जवाब को अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए जवाब देने वाला नहीं बल्कि जवाब सुनने वाला महत्वपूर्ण होता है | यहाँ पर सुनना और जवाब देना किस भी माध्यम से हो सकता है: पढ़कर, सुनकर, देख कर या महसूस कर के|

आइये अब प्रश्न पर आते हैं |

मुझे लगता है कि वृत्त से निम्न लिखित बातें सीखी जा सकती हैं :

  • किसी घर्षण युक्त उबड़ खाबड़ रस्ते पर अगर किसी आकार को चलाया जाए तो वृत्त का आकार ही ऐसा है जो सबसे कम विचलित हुए और बिना रुके गतिमान होगा| जी हाँ आपका अंदाजा सही है कि इंसान का मन ऐसा ही होना चाहिए की ये जो उबड़ खाबड़ कठिनाइयों से भरा जीवन का रास्ता है, वहां पर इंसान सुचारु रूप से सहजता से चल पाए |
  • अगर हम वृत्त को जीवन माने, केंद्र को अपना मूल और परिधि को जीवन का भौतिक विस्तार तब हम ये देखते हैं की जीवन का कितना भी भौतिक विस्तार क्यों न हो जाये हमें हमेशा अपने मूल से जुडे़ रहना चाहिए अगर ऐसा नहीं करेंगे तो जीवन का आकार बेढंगा और बेडौल हो जायेगा |
  • आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो वृत्त के ऊपर अगर वक्त के द्वारा दी हुई कैसी भी मिटटी, चाहें सुख की या दुःख की, डाली जाये तो ये इस मिटटी से खुद को ढकने नहीं देता और एक तटस्थता दिखता है | ये अध्यात्म की उस बात को चरितार्थ करता है जिसमें वो कहते हैं कि दुःख से बहुत दुखी मत हो, और सुख से बहुत खुश नहीं, ये दोनों ही तुम्हे बेहोश कर देते हैं | तुम्हारे मन को ढक देते हैं | इस प्रकार वृत्त साक्षी भाव का द्योतक हो |
  • दिए हुए क्षेत्रफल के लिए वृत्त का परिमाप सबसे कम होता है | ये हमें सिखाता है: विनम्र होना| हमारे पास जितनी भी योग्यता हो लेकिन हमें झूठा दिखावा और घमंड न करके जितनी जरुरी हो उतना ही विस्तार दिखाना चाहिए|
  • वृत्त के आकर में कोई तीक्ष्ण किनारा नहीं होता है | फिर हमारे मन में तीक्ष्ण किनारे बनाकर दूसरों और खुद को चोट क्यों पहुंचाए | मन ऐसा हो कि जहाँ हाथ फेरो वहां पर सरल और सहज अनुभूति हो न कि तीक्ष्ण किनारे से हाथ छिल जाये |
  • वृत्त जब रोल करता हुआ आगे बढ़ता है तब उसका एक-एक हिस्सा ऊपर नीचे होता है बस केंद्र को छोड़ कर | यह अपने स्थान से डगमगाता नहीं | थिर रहता है | यही इंसान की आत्मा है, जो अगर न थिरे तो सबकुछ ऊपर नीचे हो जाने पर भी जीवन की गति में एक हारमनी बनी रहती है |
अभय शर्मा की प्रोफाइल फ़ोटो

शायद आपका मतलब वृत्त की आकृति से है।

-वृत की परिधि का प्रत्येक बिन्दु केन्द्र से समान दूरी पर तथा बंधा हुआ होता है।
जो संकेत देता है कि प्रत्येक परिस्थिति मे समान रहे,सबको एक ही नजर से देखे तथा समान व्यवहार करें।

-अपनी जड़ों को न भूलें।(be down to earth)
-मर्यादा मे रहे।
-संगठित रहे।

-वृत बनाने के लिये आपको/साधन को इसके अंदर आना ही पड़ेगा मतलब की किसी काम के लिये दूसरों/समाज पर निर्भर न होकर या उन्हें दोषी न ठहराकर स्वयं से शुरुआत करें।

-साथ ही आप पायेंगे कि इसकी आकृति में आपको कहीं भी तीक्ष्णता/प्रवणता नहीं मिलेगाी जो कि मेरे खयाल में सहिष्णुता व सहजता का द्योतक है।

सुझाव सादर आमंत्रित।
धन्यवाद!

Nidhi Srivastava की प्रोफाइल फ़ोटो

2pie r-2r=15

2r(pie-1)=15

2r*15/7=15

r=3.5///

pie(r)^2=22/7*7/2*7/2= 154/4=।।।।38.5 ।Ans।।

User-9312487054055601190 की प्रोफाइल फ़ोटो

हस्त रेखा विज्ञान सीखने के लिए सबसे पहले हमें किताबें पढ़ने की आवश्यकता नहीं होती।

हम यह सीख सकते हैं कि हमारी हाथों की रेखाओं को ध्यान से देखकर और समझकर हमारे जीवन में ज्यादा ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। हस्त रेखा विज्ञान में कुछ चिन्हों और रेखाओं के मतलबों को समझने का प्रयास करें, जैसे कि हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा, और जीवन रेखा। यदि आपके पास कोई ज्ञानी व्यक्ति है जो हस्त रेखा विज्ञान में माहिर है, तो आप से सीखने के लिए उनसे प्रश्न पूछ सकते हैं। हस्त रेखा

विज्ञान में सीखने का महत्वपूर्ण हिस्सा है स्वाध्याय और अनुभव करना, तो अपनी हाथों की रेखाओं को देखने में समय बिताएं और धीरे-धीरे इस महत्वपूर्ण वि

हस्त रेखा विज्ञान सीखने के लिए सबसे पहले हमें किताबें पढ़ने की आवश्यकता नहीं होती।

हम यह सीख सकते हैं कि हमारी हाथों की रेखाओं को ध्यान से देखकर और समझकर हमारे जीवन में ज्यादा ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। हस्त रेखा विज्ञान में कुछ चिन्हों और रेखाओं के मतलबों को समझने का प्रयास करें, जैसे कि हृदय रेखा, मस्तिष्क रेखा, और जीवन रेखा। यदि आपके पास कोई ज्ञानी व्यक्ति है जो हस्त रेखा विज्ञान में माहिर है, तो आप से सीखने के लिए उनसे प्रश्न पूछ सकते हैं। हस्त रेखा

विज्ञान में सीखने का महत्वपूर्ण हिस्सा है स्वाध्याय और अनुभव करना, तो अपनी हाथों की रेखाओं को देखने में समय बिताएं और धीरे-धीरे इस महत्वपूर्ण विज्ञान का अध्ययन करें।

Om Parkash Arya की प्रोफाइल फ़ोटो

किसी भी वृत में बने उस आयत के क्षेत्रफल का उच्चतम मान अन्य आयतों जो उसी वृत में बनी हों से अधिक तब होगा जब उस आयत की लम्बाई तथा चौड़ाई समान हों यानी वह आयत एक वर्ग हो। और वर्ग तब बनेगा जब वृत की दो व्यास रेखाएं केंद्र पर 90 अंश का कोण बनाएं तथा जहाँ चारों छौर वृत पर मिलें वहां से वर्ग की भुजाओं को बनाया जाए । अब इस वर्ग का क्षेत्रफल होगा इस वृत का व्यास × वृत की त्रिज्या

Durgesh Tinker की प्रोफाइल फ़ोटो

अगर रेखा के समीकरण में (0,0,0) सन्तुष्ट हो तो वो मूल बिंदु से गुजरती है।

एक बाहरी बिन्दु से वृत्त पर केवल दो स्पर्श रेखायें खींची जा सकती हैं।

Indra Parekh की प्रोफाइल फ़ोटो

वैसे तो आपके प्रश्न के अनुसार,

वृत में एक ही व्यास पर,

केंद्र को स्पर्श करते हुए,

अनगिनत कौन बना सकते है,

ओर इन सबका मान,

वृत के व्यास के केंद्र को स्पर्श करती हुई संख्या के ऊपर आधारित है,

अगर वृत में व्यास के केंद्र को स्पर्श करती हुई वृत की परिधि को स्पर्श करती हुई 180 लाइन खिंच ली जाए तो हर एक कौन का मान 1° होगा।

Sumant Kashyap की प्रोफाइल फ़ोटो

वृत्त की जीवा और स्पर्श रेखा में अंतर:-

वृत्त की जीवा वृत्त की परिधि के दो विंदुओ को स्पर्श करती

हैं। जबकि वृत्त की स्पर्श रेखा वृत्त को केवल एक ही विंदु पर स्पर्श करती है।

Alok Srivastava की प्रोफाइल फ़ोटो

अनन्त स्पर्श रेखाएं

Om Parkash Arya की प्रोफाइल फ़ोटो

एक और सूत्र है जिससे आज भी गोल वस्तु का क्षेत्रफल लगभग ठीक निकाला जाता है वह है उसका परीमाप निकल कर उसके चार बराबर भाग करें फिर एक भाग का वर्ग करदें यही वृत का क्षेत्रफल होगा।

Hariprakash Tiwari की प्रोफाइल फ़ोटो

वृत्त की परिधि पर 6 बिन्दुओं में से किन्हीं दो बिन्दुओं की मिलानेवाली रेखाओं की संख्या 6C2 सूत्र के अनुसार 15 होगी ।

Shital Bissu की प्रोफाइल फ़ोटो

वृत की परिधि=2πr

व्यास=2r

2πr-2r=15

r=15/2π-2

वृत का क्षेत्रफल=πr^2=π(15/2π-2)^2

=π×(12.2645)

=38.5104

मृणाल कान्ति राय की प्रोफाइल फ़ोटो

केवल दो स्पर्श रेखाएँं खींची जा सकती है।

Sompal Singh की प्रोफाइल फ़ोटो

वृत्त को स्पर्श रेखा किसी एक बिंदु पर स्पर्श करके गुजरती है प्रतिषेध नहीं करती

Rai Garima Rai की प्रोफाइल फ़ोटो

वृत के किसी भी बिंदु पर खीची जाने वाली स्पर्श रेखा का स्पर्श बिंदु त्रिज्या के लंबवत होता है|

सुरेन्द्र सिह की प्रोफाइल फ़ोटो

वृत की स्पर्श रेखा तथा त्रिज्या मे कोई सम्बन्ध नही है ।त्रिज्या स्पर्श रेखा के समानान्तर लम्बवत आदि किसी भी स्थिति मे खीची जा सकती है ।

K P Mishra की प्रोफाइल फ़ोटो

वृत्त का वह बिन्दु, जहाँ से परिधि के हर बिन्दु से दूरी समान होती है। वृत्त का केंद्र कहलाता है ।