हमारे आदिग्रंथों में पंचदेवों को परम पूजनीय माना गया हैं। पंचदेव ब्रह्म, विष्णु, महेश, गणेश और सूर्य को माना जाता है। रविवार का दिन हमारे पंचदेवों में एक सूर्यदेव को समर्पित किया गया है। इसलिए रविवार व्रत की महता और भी बढ़ जाती है। माना जाता है की अगर सूर्यदेव का आशीर्वाद आपके पास हैं तो आपकी हर मनोकामना पूर्ण होती हैं और कोई सांसारिक दुख आपको छू भी नहीं सकता। इसलिए हमने सूर्यदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए रविवार का व्रत करना चैये। लेकिन किसी भी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता हैं जब वह पूरे विधि विधान से किया जाए। तो आइए जानते हैं रविवार के दिन सूर्यदेव की पूजन विधि।
- सूर्यदेव का व्रत लगातार 12 रविवार तक या एक वर्ष तक रखना बहुत शुभ माना जाता है।
- जब आप सुरदेव का रविवार व्रत शुरू कर रहें हैं तो पहले रविवार की सुबह व्रत का संकल्प लें की आप कितने रविवार का व्रत रखेंगे।
- हर रविवार को जब सूर्य उदय होता है तो सूर्यदेव को जल का अर्ग दें और उनके आशीर्वाद की कामना करें। इस बात का ध्यान रखें की आप सूर्योदय से थोड़ा पहले उठ जाए ताकि सूर्योदय से पहले नहा धोकर साफ कपड़े पहनकर सूर्यदेव को अर्ग दें सके।
- रविवार को लाल रंग के पकड़े पहने और माथे पर लाल चंदन का तिलक लगाएं।
- रविवार व्रत के दिन सात्विक दिनचर्या रखें। किसी को कठोर वचन नही कहे और किसी से वाद विवाद और झगड़ा नहीं करें। पूरे दिन भगवान सूर्य को याद करते रहें और उनके मंत्र पढ़ें।
- दिन में फलाहार चाय आदि ले सकते हैं । यह भी पढ़ें - रविवार के दिन का भोजन
- अगर आपने व्रत रखा हैं तो रविवार को दिन में नहीं सोएं।
- शाम को सूर्यदेव की पूजा की जाती है। लेकिन ध्यान रखें की सूर्यदेव की पूजा कभी भी सूर्यास्त के बाद नहीं की जाती है। इसलिए सूर्यदेव की पूजा सूर्यास्त से 1,2 घंटे पहले शुरू करें और सूर्यास्त से पहले पूर्ण कर लें।
- यह भी पढ़ें - सूर्यदेव की पूजा की सम्पूर्ण विधि और पूजा सामग्री list ।
- सूर्यदेव की पूजा करने के बाद सूर्यदेव की रविवार की कथा जरूर सुने।
- पूजा पाठ पूर्ण करने के बाद आप भोजन कर सकते हैं। यह भोजन मीठा और बिना नमक का खाया जाता है।
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