विश्व हिन्दू परिषद (VHP) भारत के अन्य ट्रस्टो के समान ही भारतीय ट्रस्ट अधिनियम के तहत पंजीकृत एक एनजीओ या प्राइवेट ट्रस्ट है, जबकि राष्ट्रिय हिन्दू बोर्ड (RHB) नामक ट्रस्ट का गठन प्रस्तावित हिन्दू बोर्ड में दर्ज विशिष्ट प्रक्रिया के तहत होगा।
हिन्दू बोर्ड एवं विश्व हिन्दू परिषद में मुख्य अंतर निम्नलिखित है :
(1) सदस्य संख्या :
- VHP में सदस्य संख्या सीमित है, और कौन सदस्य हो सकता है, इसे तय करने का अधिकार VHP के ट्रस्टियों के पास है
- RHB के प्रस्तावित क़ानून में यह प्रावधान है कि भारत का प्रत्येक हिन्दू स्वत: ही हिन्दू बोर्ड का सदस्य होगा। इस तरह हिन्दू बोर्ड का गठन होने के पहले दिन ही इस ट्रस्ट के सदस्यों की संख्या लगभग 80 करोड़ के आस पास होगी। बाद में जो हिन्दू नागरिक हिन्दू बोर्ड के सदस्य नहीं होना चाहते वे अपना नाम सदस्यों की सूची में से कटवा सकते है।
(2) मतदान अधिकार :
- VHP में इसके सदस्यों के पास मुखिया ( प्रधान ट्रस्टी ) को चुनने का अधिकार नहीं है। VHP के प्रमुख की नियुक्ति करने का अधिकार सिर्फ इसके कुछ ट्रस्टियों के पास ही है।
- RHB में सभी सदस्य मतदाता सदस्य होंगे और हिन्दू नागरिको को यह अधिकार होगा कि वे RHB के मुखिया ( संघ प्रधान ) को चुनने के लिए वोट कर सके। इसके अलावा RHB के सदस्यों के पास वोट वापसी का अधिकार भी होगा। और इस अधिकार का प्रयोग करके हिन्दू नागरिक संघ प्रधान को बदल कर किसी अन्य व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त करने के लिए स्वीकृति दे सकेंगे।
(3) मंदिरों का प्रबंधन करने के कानूनी अधिकार
- VHP के पास हिन्दू मंदिरों का प्रबंधन करने एवं मंदिरों के स्वामित्व के झगड़े निपटाने का अधिकार नहीं है।
- RHB के पास उन सभी मंदिरों में आये हुए दान का प्रबंधन करने का अधिकार होगा जिन मंदिरों के ट्रस्टियों ने अपने मंदिर का प्रबंधन हिन्दू बोर्ड को सौंप दिया है। जो ट्रस्टी अपना मंदिर हिन्दू बोर्ड को स्वेच्छा से सौंप देंगे उनके स्वामित्व के झगड़े जज के पास नहीं जायेंगे बल्कि ये मुकदमे जूरी सुनेगी। जूरी का गठन हिन्दू बोर्ड के सदस्यों में से लॉटरी द्वारा किया जाएगा।
[ स्पष्टीकरण : उदाहरण के लिए, यदि शबरीमला, सिंगलादेव, उज्जेन महाकाल आदि के ट्रस्टी अपने मंदिर का प्रबंधन करने का जिम्मा हिन्दू बोर्ड को सौंप देते है तो इन तीनो मंदिरों के जितने भी मुकदमे कोर्ट में चल रहे है वे हिन्दू बोर्ड की जूरी में चले जायेंगे, और जूरी ही इसका फैसला देगी। यदि आप हिन्दू है और आपने अपना नाम हिन्दू बोर्ड की सदस्य सूची में से नहीं कटवाया है, और यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है । तब आपको जूरी ड्यूटी में आकर अमुक मामले में दोनों पक्षों को सुनकर अपना फैसला देना होगा।]
(4) अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट का स्वामित्व :
- VHP के पास अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट को प्रबंधन करने का अधिकार नहीं है ।
- हिन्दू बोर्ड के प्रस्तावित क़ानून में यह प्रावधान है कि अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट का स्वामित्व हिन्दू बोर्ड के पास होगा। हिन्दू बोर्ड अयोध्या के भूखंड पर मंदिर निर्माण करेगा, और आने वाले दान का प्रबंधन करेगा।
(5) हिन्दू बोर्ड के प्रस्तावित क़ानून में “राष्ट्रिय सनातन रजिस्ट्रार” की नियुक्ति का भी प्रावधान है। अत: हिन्दू बोर्ड के गेजेट में आने के बाद हिन्दू देवस्थानम अधिनियम अप्रभावी हो जाएगा, और मंदिरो का स्वामित्व रखने वाले सभी धार्मिक ट्रस्टो, पन्थो, सम्प्रदायों आदि का पंजीयन राष्ट्रिय सनातन रजिस्ट्रार के पास किया जायेगा। किन्तु राष्ट्रिय सनातन रजिस्ट्रार विभिन्न सम्प्रदायों, पन्थो, मठो आदि का अधिग्रहण नहीं करेगा, और न ही उनके दान का प्रबंधन करेगा। रजिस्ट्रार सिर्फ इनके मध्य स्वामित्व को लेकर होने वाले आपसी झगड़े निपटाने का काम करेगा। और सभी झगड़े नागरिको की जूरी द्वारा ही सुने जायेंगे।
.
————-
.
दुसरे शब्दों में, हिन्दू बोर्ड मतदाता सदस्यों के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक ट्रस्ट होगा, और इस ट्रस्ट के पास भारत की सीमाओं में हिन्दू धर्म के प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए प्रचुर मात्रा में संसाधन एवं कानूनी अधिकार होंगे। हिन्दू धर्म का जिस तेजी से क्षरण हो रहा है, उसे रोकने के लिए हिन्दू बोर्ड जैसे ताकतवर ट्रस्ट की जरूरत है। VHP जैसे निजी संगठनो के पास इस पैमाने पर संसाधन एवं अधिकार नहीं हो सकते कि वे हिन्दू धर्म के क्षरण को रोक सके। और खासकर तब जब मिशनरीज भारत में विस्तार कर रहे हो।
हिन्दू बोर्ड में VHP, RSS जैसे सभी संगठनो के सदस्य शामिल होंगे, और RSS या VHP के शीर्ष नेता वगेरह RHB में ट्रस्टियों के रूप में चुनकर जा सकेंगे। तो एक तरह से हिन्दू बोर्ड VHP या RSS का प्रतिद्वंदी ट्रस्ट नहीं है। हिन्दू बोर्ड आने के बाद चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में रहे, हिन्दू संघ प्रधान निरंतर हिन्दू धर्म को मजबूत बनाने की दिशा में काम करता रहेगा।
सार रूप में हिन्दू बोर्ड एक झटके में ही देश के सभी हिन्दुओ को धार्मिक रूप से संगठित कर देता है। ( और वो भी बिना किसी राजनैतिक घर्षण के )
फ़िलहाल, धर्म के प्रबंधन का इस तरह का व्यवस्थागत ढांचा सिर्फ सिक्ख धर्म में है। सिक्ख धर्म इसी तरह के ट्रस्ट “शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी” (SGPC) द्वारा शासित होता है। SGPC की अलग से वोटर लिस्ट है और वे ग्रंथीयों को चुनने के लिए मताधिकार का प्रयोग करते है।
इस बारे में और भी विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिए है – हिन्दूओं को अपने धर्म के विस्तार के लिए इस समय क्या कदम उठाना चाहिए? के लिए Pawan Kumar Sharma का जवाब
यदि भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्रिय हिन्दू बोर्ड का प्रस्तावित क़ानून गेजेट में प्रकाशित कर देते है तो हिन्दू बोर्ड का गठन हो जायेगा। #HinduBoard
.
========