यदि किसी भी व्यक्ति पर कोई मुकदमा लंबित नहीं रहेगा तो सुप्रीम कोर्ट-हाई कोर्ट के भ्रष्ट जज एवं राजनेता लोगो को ब्लेकमेल करने की क्षमता गँवा देंगे। जिस देश में सरकार एवं जज वगेरह लोगो की नस को दबा कर रखना चाहते है वे अपनी अदालतों को सुस्त बनाए रखते है। समाधान - राईट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करना।
सरकारे जान बूझकर ऐसे कानून बनाती है कि ज्यादा से ज्यादा नागरिक को जीवन यापन के लिए इन कानूनों को तोडना पड़ता है। और जो व्यक्ति ये कानून न नहीं तोड़ेगा उसे नुकसान उठाना पड़ेगा और वह बाजार से बाहर हो जायेगा। उदाहरण के लिए जितनी भी निर्माण इकाइयाँ है वे सभी प्रदुषण मानको का उलंघन करती है। इसकी वजह यह है कि सरकार ने प्रदुषण मानक ही ऐसे बनाए है कि ज्यादातर निर्माण इकाइयों को इन्हें तोडना पड़ता है। एक छोटे औद्योगिक शहर भीलवाड़ा की मिसाल लीजिये। भीलवाड़ा में 25 प्रोसेस हाउस है और सभी प्रोसेस हाउस प्रदुषण मानको का उलंघन करते है। शुरू में कुछ 2-3 प्रोसेस से प्रदुषण मनको का उलंघन करना शुरू करेंगे किन्तु, प्रदुषण विभाग पहले चरण में इन्हें रोकेगा नहीं , बल्कि उन्हें प्रदुषण करने देगा। अब जो प्रोसेस हाउस प्रदुषण मानको का पालन करेगा कपड़ा प्रोसेस करने की उसकी लागत बढ़ जायेगी अत: सभी प्रोसेस हाउस प्रदुषण मानको का उलंघन करने लगेंगे। इस तरह सभी प्रोसेस हाउस प्रदुषण विभाग के अपराधी बन गए है। अब प्रदुषण विभाग का कमिश्नर इन प्रोसेस हॉउस में जायेगा और हफ्ता वसूलना शुरू करेगा। जो प्रोसेस हाउस हफ्ता नहीं देगा उसका प्लांट सीज कर दिया जाएगा !! इस तरह पहले सरकार ऐसे क़ानून बनाती है ताकि लोग इन्हें तोड़े और फिर प्रदुषण विभाग इन्हें क़ानून तोड़ने देता है। और उनके अपराधी होने के बाद उन्हें पकड़ा नहीं जाता बल्कि उनसे हफ्ता वसूल करना शुरू कर दिया जाता है।
अब जब चुनाव आयेंगे तो राजनैतिक पार्टियों के नेता इन प्रोसेस हाउस के मालिको से चंदा देने को कहेंगे। चूंकि सभी लोग अपराधी है अत: ये लोग सिर्फ झुका कर नेताजी को हफ्ता दे देंगे। बाद में मंत्री जी इन प्रोसेस हाउस के मालिको से पैसा वसूल करेंगे और इनकार करने पर प्रदुषण अधिकारी को प्रोसेस हॉउस सीज करने को कहेंगे। इस तरह जीतने ज्यादा नागरिक क़ानून तोड़ते है उतने ही ज्यादा सरकार का उन पर नियन्त्रण बढ़ता जाता है। यदि कोई व्यक्ति क़ानून न तोड़ेगा तो उसे दबाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। नेता चाहते है कि प्रत्येक छोटा बड़ा आदमी उनके सामने सिर झुका कर रहे इसके लिए वे उन्हें फंसा कर रखने के लिए ऐसे क़ानून बनाते है।
इसी दुश्चक्र का अगला चरण अदालतें है। भारत के भ्रष्ट जज चाहते है है कि ज्यादा से ज्यादा नेताओ , उद्योगपतियों , कारोबारियों आदि की टाँगे अदालतों में फंसी हुयी रहे। इसके लिए उन्होंने भारत की अदालतों को बेहद सुस्त बना कर रखा है। और एक बार जो आदमी अदालत में आ गया जज उसे वर्षो तक अदालतों में लटका कर रखते है , ताकि भ्रष्ट जज उनसे लगातार घूस वसूलते रहे। उदाहरण के लिए सलमान खान पर 1998 में , लालू पर लगभग 1995 में एवं जय ललिता पर 1993 में केस दर्ज हुआ था। यदि इनके मुकदमे का फैसला यदि साल दो साल में आ जाता तो जजों को काफी कम घूस मिलती और ये लोग जजों के चंगुल से आजाद हो जाते। भ्रष्ट जज चाहते है कि इन विशिष्ट लोगो को चंगुल में रखा जाए और नियमित रूप से इनसे हफ्ता वसूला जाए। इस तरह भारत के भ्रष्ट जजों ने सभी विशष्ट जनो , अधिकारियो , नेताओं आदि की फाइल्स अपनी दराजो में रखी हुयी है। जब भी उन्हें किसी नेता / अधिकारी / उद्योगपति आदि को दबाना होता है या उससे पैसा वसूलना होता है तो वे इनकी फाइल्स निकालकर टॉप गियर में डाल देते है और पैसा मिलने पर मुकदमे को फिर से फर्स्ट गियर में ले आते है। अत: ज्यादा से ज्यादा लोगो को अदालतों में फंसा कर रखने के लिए भारत के सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों ने अदालतों को जान बूझकर धीमा किया हुआ है। और जनता को बेवकूफ बनाने के लिए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा केमरों के सामने आते है और आंसू गिराते हुए जजों की कमी का रोना रोते है।
दूसरा कारण यह है कि जिस देश में अदालतें सुस्त और भ्रष्ट होती है उस देश की उत्पादकता बेहद कम हो जाती है, अत: बहुराष्ट्रीय कम्पनियां देश की उत्पादकता गिराए रखने के लिए अदालतों को सुस्त बनाए रखती है। चीन की उत्पादकता इसीलिए ज्यादा है क्योंकि वहां की अदालते भारत की तुलना में कम भ्रष्ट है और तेजी से काम करती है। चीन में 2 लाख जज है और जबकि भारत में सिर्फ 17,000 जज है।
अमेरिका हथियारों के निर्माण में इसीलिए पूरी दुनिया से आगे निकल गया क्योंकि अमेरिका की अदालतें पूरी दुनिया में सबसे बेहतर तरीके से काम करती है , और वहां भ्रष्टाचार भी बेहद कम है। अमेरिका में ज्यूरी सिस्टम एवं राईट टू रिकॉल जज का कानून होने के कारण वहां किसी भी मुकदमे का फैसला हफ्ते दो हफ्ते में आ जात है जबकि भारत में वर्षो तक मुकदमे लटकते रहते है , और उत्पादकता गिरती है।
भारत की अदालतों को सुधारने के लिए मेरा प्रस्ताव निम्नलिखित है :
1. सुप्रीम कोर्ट जज , हाई कोर्ट जज , एवं जिला जजो पर राईट टू रिकॉल जज क़ानून प्रक्रियाएं
2. साक्षत्कार का समापन - निचली अदालतों में जजों की नियुक्ति सिर्फ लिखित परीक्षा द्वारा की जायेगी। साक्षात्कार सिर्फ भाई भतीजा वाद एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है।
3. निचली अदालतों में नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षा में गणित का पाठ्यक्रम भी शामिल किया जाए , ताकि तर्कशक्ति विहीन व्यक्तयों के क़ानून की किताबें रट कर जज बनने की सम्भावना में कमी आये।
4. निचली अदालतों में मुकदमो की सुनवाई के लिए ज्यूरी सिस्टम - ज्यूरी सिस्टम हमारा सबसे मुख्य प्रस्ताव है। जूरी सिस्टम ऐसा क़ानून है जो लागू होने के 24 घंटो के भीतर व्यवस्था में नाटकीय ढंग से सुधार ले आएगा। इसका विवरण आगे दिया गया है। ।
5. अपील के लिए हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में जूरी सिस्टम।
6. 1 लाख नयी निचली अदालतों की स्थापना , एवं जजों की संख्या बढ़ाकर 200,000 करना।
7. कक्षा 6 से क़ानून की शिक्षा को पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल करना।
8. व्यस्को को क़ानून की मुफ्त शिक्षा।
9. जजों को शामिल करते हुए सभी सरकारी अधिकारियों एवं उनके बेहद घनिष्ठ रक्त संबंधियों ( माता-पिता-पुत्र-भाई आदि ) की सम्पत्ति की सार्वजनिक घोषणा। इस घोषणा में उनके सभी बैंक खातो , लॉकर , जमीन आदि शामिल है। सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि अमुक अधिकारी कितने ट्रस्टो एवं कम्पनियों में है और इन ट्रस्टो एवं कम्पनियों के पास कितनी जमीन है। यदि किसी सरकारी अधिकारी या जज को यह घोषणा करने में दिक्कत है तो उसे इस क़ानून के तहत बाध्य नहीं किया जाएगा किन्तु तब वह नौकरी से इस्तीफा दे सकता है।
10. सभी जजों एवं सरकारी अधिकारियो एवं उनके घनिष्ठ रक्त संबंधियों की नागरिकता का ब्यौरा सार्वजनिक करना।
11. मुकदमो के पक्षकारो को मुकदमे की अद्यतन जानकारी की सूचना ईमेल एवं SMS से देना।
इन कानूनों के प्रस्तावित ड्राफ्ट देखने के लिए यह लिंक देखें -- Proposed law drafts - Hindi
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